सरोज सिंहजाका गुरु अंधला, चेला खरा निरंध. अंधे-अंधे ठेलिया, दोनों कूप पड़ंत…! कबीर की यह पंक्ति बिहार

की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर बिलकुल सही बैठती है. राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आंकड़ों में चाहे जितनी शेखी बघार लें, लेकिन यह एक बड़ी सच्चाई है कि ग़लत बहाली नीति के कारण राज्य की बुनियादी शिक्षा का स्तर तेज़ी से गिर रहा

है और चौपट होने के कगार पर है. पहले झटपट बहाली ने, फिर उसके बाद परीक्षा ने तो और भी बेड़ा गर्क कर दिया है. राज्य के कई निजी स्कूलों में एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय मानक स्तर की प़ढाई कराई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में अनिवार्य शिक्षा के नाम पर स़िर्फ खानापूर्ति की जा रही है. यहां के ज़्यादातर स्कूलों की स्थिति यह है कि भवन है, तो शिक्षक नहीं, शिक्षक है, तो.......
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